कलियुग पर विजय
ॐ श्री गणेशाय नमः ! ………………………………….. कलियुग पर विजय एक आत्मयात्रा माध्यम – भक्त विष्णु ( आयु 32 वर्ष ) ………………………………….. विषय सूची :– पहला अध्याय :– आत्म संदेश . नतमस्तक धन्यवाद एवं समर्पण . विनम्र प्रार्थना . आंतरिक यात्रा . कृपया जागिए —------ दूसरा अध्याय :– अज्ञान और जीवन भ्रम . ज्ञान का अभाव . अविश्वास और विरोध . अति सहनशील प्रकृति . टूटती जागरूकता . झूठी भयकारण भक्ति . दबा आत्मबोध . समझ और संयम . प्रतियोगिता का सही अर्थ . हम युवाओं की अजागरूक चेतना . नशा : मात्र एक झूठा सुकून . प्रगति : भीतर की अशांति . शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य . इंटरनेट : साधन या समय की चोरी . तकनीक और हमारा जीवन . स्वार्थ और मोह : दुःख का मूल कारण . जीवन में अशांति . मनोरंजन की अति : बच्चों की पुकार . सत्य नेतृत्व की आवश्यकता . घोर कलियुग या सोई हुई आत्मा . स्वतंत्रता : वास्तविक दृष्टि में . मजबूरी जैसा जीवन . भविष्य की दिशा नरक की ओर . क्या किया जीवन में आकर . विकास नहीं : अब सुधा...